नगराधीश ने टाउन पार्क में  स्कूली बच्चों द्वारा निकाली गई मैराथन रैली को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

निपुण गृह कार्य के अंतर्गत बच्चे एक दिन करेंगे टीवी व मोबाइल से परहेज

जिले में निपुण मि यूशन के अंतर्गत बलवाटिका से कक्षा पाँचवी के गृह कार्य को करने में बच्चों में दिख रहा भारी उत्साह

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पंचकूला, 9 जून उपायुक्त एवं मिशन डायरेक्टर एफ एल एन डॉ यश गर्ग की अध्यक्षता एवं जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी संध्या मलिक की देख रेख में जिला पंचकूला में चल रहे निपुण मिशन के अंतर्गत इस सप्ताह कक्षा बालवाटिका से पाँचवी के बच्चे एक दिन टीवी व मोबाइल से पूर्णतया परहेज रखेंगे | जिला एफ एल एन समन्वयक असिन्द्र कुमार ने बताया कि इस सप्ताह बच्चे गृह कार्य में अपने घर के वाहनों की प्रतिदिन रीडिंग नोट करेंगे वह वाहन कितना चला इसकी गणना करके अपने परिवार के सदस्यों को बताएंगे | इसके अतिरिक्त बच्चे प्रतिदिन तापमान नोट करेंगे, सुबह जल्दी उठकर पशु पक्षियों के लिए दाना पानी का इंतजाम करेंगे, घर में उपलब्ध, टी वी, प्रेस, फ्रिज,बिजली उपकरण बनाने वाली कम्पनी के लोगो की पहचान, कम्पनी के नाम के स्पेलिंग जानेंगे अपने व परिवार के सदस्यों के आधार कार्ड नं याद करेंगे |
एफ एल एन कोऑर्डिनेटर असिन्द्र कुमार के नेतृत्व में जिला पंचकूला की कोर टीम बी आर पी अंजली, दिव्या, रजनी व कृष्णा द्वारा शिक्षा निदेशालय से प्राप्त गृहकार्य को 4 सप्ताह में बांटा गया है ताकि प्रत्येक सप्ताह प्रगति का रिव्यु लिया जा सके |
प्रथम सप्ताह का रिव्यु लिया जा चुका है जिसमें बच्चों में भारी उत्साह देखने को मिला है

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नगराधीश ने टाउन पार्क में  स्कूली बच्चों द्वारा निकाली गई मैराथन रैली को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

*28वें महावीर अवार्ड के लिए आवेदन आमंत्रित, 30 जुलाई तक करें अप्लाई*

*विजेता को मिलेगा 10 लाख रुपए, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह*

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पंचकूला, 9 जून – उपायुक्त डा. यश गर्ग ने बताया कि भगवान महावीर फाउंडेशन द्वारा 28वें महावीर अवार्ड के लिए चार क्षेत्रों क्रमश: अहिंसा और शाकाहार, शिक्षा, दवा व समुदाय और सामाजिक सेवा में आवेदन आमंत्रित किए हैं, जिसके लिए अंतिम तिथि 30 जुलाई निर्धारित की गई है। फाउंडेशन द्वारा चार क्षेत्रों क्रमश: अहिंसा और शाकाहार, शिक्षा, दवा व समुदाय और सामाजिक सेवा में पुरस्कार महावीर दिए जाने हैं, जिनमें प्रत्येक क्षेत्र में विजेता को 10 लाख रुपए, एक प्रशस्ति पत्र और एक स्मृति चिन्ह प्रदान किया जाएगा।

डा. यश गर्ग ने बताया कि इस अवार्ड के लिए गरीब तबके व समाज के लिए सेवाएं देने वाले संस्थान और लोग आवेदन कर सकते हैं। इस योजना के तहत अहिंसा और शाकाहार, शिक्षा, दवा व समुदाय और सामाजिक सेवा के अवार्ड दिए जाएंगे। इन पुरस्कारों के लिए विजेताओं का चयन भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एमएन वेंकटाचालिहा की अध्यक्षता में न्यायपीठ द्वारा किया जाता है। प्रत्येक अवार्ड में 10 लाख रुपये, एक प्रशस्ति पत्र व एक स्मृति चिह्न दिया जाएगा। इसके लिए नागरिक 30 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। है।

उन्होंने बताया कि अवार्ड के लिए निर्धारित आवेदन पत्र को भरकर डाक द्वारा भगवान महावीर फाउंडेशन, सियाट हाउस, 961, पूनमल्ली हाई रोड, पुरासावाल्कम, चेन्नई, तमिलनाडु-600084 अथवा ई-मेल nominations.bmfawards@gmail.com के माध्यम से भिजवा सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए भगवान महावीर फाउंडेशन की वेबसाइट bmfawards.org/ पर लॉगिन कर सकते हैं।

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*100 दिनों का त्यौहार, एनीमिया पर वार*

*एनीमिया मुक्त अभियान में लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर रोगी का इलाज किया जाएगा शुरू – डॉ. शिवानी*

*स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग मिलकर लगाएंगे एनीमिया जांच शिविर*

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पंचकूला, 9 जून- उपायुक्त डॉ. यश गर्ग के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में जिला में 100 दिनों का त्यौहार- एनीमिया पर वार नाम से लोगों को एनीमिया से मुक्ति दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान को सार्थक बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग को आपसी तालमेल बनाकर कार्य करेंगे ताकि जिला में चिन्हित किए गए शत-प्रतिशत लोगों के एनीमिया से संबंधित स्वास्थ्य की जांच की जा सके। 100 दिन तक चलाए जाने वाले एनीमिया मुक्त अभियान में जिला में लोगों के स्वास्थ्य की जांच की जानी है, जिनमें बच्चे, किशोरी और महिलाएं शामिल है।

एनीमिया मुक्त भारत अभियान के जिला नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शिवानी ने कहा कि इस अभियान के तहत जिला के सरकारी तथा गैर सरकारी स्कूलों में योजनाबद्ध कार्य करके बच्चों विशेष कर लड़कियों के स्वास्थ्य की जांच की जाएगी। इन शिविरों में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जानी चाहिए, जिन बच्चों में खून की कमी पाई जाती है, उन बच्चों को मौके पर ही दवाईयां देने के साथ-साथ पोषाहार खानपान के लिए जागरूक किया जाए। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं व किशोरियों के स्वास्थ्य की भी जांच की जाए। उन्होंने कहा कि विशेषकर गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच की जानी है ताकि नवजात बच्चे के साथ-साथ उसकी मां का स्वास्थ्य भी सही रहे। आमतौर पर जानकारी के अभाव में महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त हो जाते हैं।

डॉ शिवानी ने कहा कि स्वास्थ्य शिविरों में एनीमिया की जांच के साथ इलाज एवं काउंसलिंग की जाएगी। जिन बच्चों का हीमोग्लोबिन कम पाया जाता है, उनको तीन श्रेणी में बांट कर दवाई दी जाए। हलके व मध्यम श्रेणी के विद्यार्थियों को विद्यालय में ही दवाई दी जानी जरूरी है, जबकि गंभीर श्रेणी वाले विद्यार्थियों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए भेजा जाए। दवाई देने के दो सप्ताह के बाद विद्यार्थियों का दोबारा हीमोग्लोबिन चेक करवाया जाए।

*स्लम बस्तियों में लगाए जाएं स्वास्थ्य जांच शिविर*

उन्होंने कहा कि स्लम बस्तियों में भी स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में महिलाओं व बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जाएगी। इसी प्रकार से ईंट भळों व औद्योगिक क्षेत्र में जांच शिविर आयोजित करना जरूरी है ताकि श्रमिक महिलाओं व उनके बच्चों का स्वास्थ्य सही रहे। यहां पर भी श्रमिकों को सही भोजन की जानकारी देना जरूरी है।

*एनीमिया ग्रस्त व्यक्ति में अन्य बीमारियों होने की संभावना*

 डॉ. शिवानी ने बताया कि जब शरीर के रक्त में लाल कणों या कोशिकाओं के नष्ट होने की दर उनके निर्माण की दर से अधिक होती है। एनीमिया एक रक्त से संबंधित गंभीर बीमारी है। इसके होने से ग्रस्ति बालिकाओं. महिलाओं व व्यक्तियों में अन्य बीमारियों की संभावनाएं और बढ़ जाती है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए टीमों को नियुक्त किया गया है। हर टीम में स्कूल से अध्यापकों की ड्यूटी लगाई गई है। सभी स्कूलों में मशीनों द्वारा रक्त में हीमोग्लोबिन का लेवल जांच कर रिपोर्ट प्राप्त की जाएगी। इन रिपोर्टों के आधार पर ही हीमोग्लोबिन की कमी वाले बच्चों को सूची बनाकर आंगनवाडी कार्यकर्ताओं द्वारा उनके घर-घर जाकर जागरूक किया जाएगा और हीमोग्लोबिन का लेवल बढ़ाने के लिए दवाइयां एवं गुड़, चना, हरी सब्जी, फल, जूस देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से खानपान की आदतों में सुधार कर बचा जा सकता है।

*एल्यूमिनियम के बर्तन में न बनाए खाना*

उन्होंने बताया कि एल्युमीनियम के बर्तनों में खाना पकाने व खाने से यह बर्तन आयरन और कैल्शियम जैसे तत्वों को सोख लेता है। इसका मतलब अगर खाने के साथ एल्यूमीनियम पेट में जाता है तो यह शरीर से आयरन और कैल्शियम सोखना शुरू कर देता है। इससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। लिहाजा एल्यूमीनियम के बर्तन में पके खाने को खाने से हड्डियां खोखली होने लगती हैं। खाने में शामिल आयरन और कैल्शियम की मात्रा को एल्युमिनियम आसानी से अब्जॉर्ब कर लेता है और यह हड्डियों की बीमारियों का कारण बन जाता है।

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