Panjab University, Chandigarh conducted M.Phil. & Ph.D. Entrance Test on 7.3.2021.

पटवारी करेंगे परिवार पहचान पत्र में कास्ट वैरिफिकेशन का कार्य : एडीसी उत्तम सिंह

सिरसा, 04 फरवरी।

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                    अतिरिक्त उपायुक्त उत्तम सिंह ने बताया कि जिन परिवारों के परिवार पहचान पत्र बन चुके हैं और कास्ट वैरिफिकेशन नहीं हुई है, उनकी अब पटवारियों द्वारा फिजीकल वैरिफिकेशन की जाएगी तथा पोर्टल पर डाटा अपलोड किया जाएगा। इस कार्य को पूर्ण करवाने के लिए पटवारियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।


                    उन्होंने बताया कि सरकार के निर्देशानुसार परिवार पहचान-पत्र बनाने का कार्य जारी है। जिला में 80 प्रतिशत से अधिक परिवारों के पहचान-पत्र बन चुके हैं, शेष का कार्य जारी है। प्रदेश सरकार की अधिकांश योजनाओं को परिवार पहचान-पत्र के परिवार पहचान-पत्र के साथ जोड़ दी गई हैं। कुछ ऐसी योजनाएं भी हैं, जिनका लाभ स्वत: ही पात्र व्यक्तियों को मिलना शुरु हो जाएगा। नागरिकोंं को घर बैठे ही उनकी पात्रता की सूचना मिल जाएगी।

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                    उन्होंने बताया कि परिवार पहचान पत्र बनवाने वाले परिवारों के लिए प्रक्रिया का सरलीकरण कर दिया गया है, अब केवल नाम, मोबाईल नम्बर और आधार कार्ड के माध्यम से परिवार पहचान पत्र बनवाए जा सकेंगे। इसके लिए संबंधित परिवार के मुखिया को अपने नजदीकी सीएससी में जाकर आवेदन करना होगा। उन्होंने बताया कि परिवार पहचान पत्र हर परिवार के लिए जरूरी दस्तावेज है। इसके माध्यम से ही हरियाणा सरकार की सभी योजनाओं का लाभ मिलेगा।

कार्यशाला में पटवारियों को दी परिवार पहचान-पत्र में कास्ट वैरिफिकेशन कार्य की जानकारी


                    परिवार पहचान पत्र में कास्ट वैरिफिकेशन कार्य को लेकर वीरवार को स्थानीय लघु सचिवालय के बैठक कक्ष में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में राजस्व विभाग के पटवारियों को परिवार पहचान-पत्र में जाति सत्यापित करने के बारे में जरूरी जानकारी दी गई। इस अवसर पर जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी रमेश शर्मा भी मौजूद थे। कार्यशाला में मानव संसाधन एवं सूचना विभाग से मास्टर ट्रेनर सुधांशु सिंह ने पटवारियों को परिवार पहचान पत्र में जाति सत्यापन कार्य की विस्तारपूर्वक जानकारी दी।


                    डीआईओ रमेश शर्मा ने बताया कि कार्यशाला में अब परिवार पहचान-पत्र में जाति सत्यापित की जाएगी, जिसके चलते लघु सचिवालय स्थित डीआरडीए सभागार में दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। आज की कार्यशाला में 60 पटवारियों ने कास्ट वैरिफिकेशन कार्य का प्रशिक्षण लिया है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में नागरिक संसाधन सूचना विभाग चंडीगढ़ मुख्यालय से मास्टर ट्रेनर सुधांशु सिंह ने पटवारियों को प्रोजेक्टर के माध्यम से जाति अंकित करने के बारे में जानकारी दी।

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ई-ऑफिस से ही हो फाइल मूव, ढिलाई बरतने पर की जाएगी कार्रवाई : उपायुक्त प्रदीप कुमार

सिरसा, 4 फरवरी।

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उपायुक्त प्रदीप कुमार ने कहा कि ई-ऑफिस प्रणाणी सरकार का एक महत्वकांक्षी प्रोजैक्ट है, जिसका उद्ेश्य नागरिकों को योजनाओं का लाभ पारदर्शी रूप से पहुंचाने के साथ-साथ संबंधित अधिकारी व कर्मचारी की जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस कार्य में किसी प्रकार की ढिलाई व कोताही न बरती जाए और कार्यालय की सभी फाइलें ई-ऑफिस के माध्यम से ही मूव की जाएं। कोई विभाग ई-ऑफिस प्रणाली का क्रियान्वयन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसलिए विभागाध्यक्ष इसे गंभीरता से लें और जिम्मेवारी के साथ ई-ऑफिस प्रणाली का उपयोग करें।

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उपायुक्त वीरवार को लघुसचिवालय स्थित सभागार में मासिक बैठक में विभिन्न योजनाओं की समीक्षा कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने एक-एक कर योजनाओं की प्रगति की बारिकी से समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त उत्तम सिंह, एसडीएम कालांवाली निर्मल नागर, एसडीएम ऐलनाबाद दिलबाग सिंह, एसडीएम सिरसा जयवीर यादव, सिटीएम गौरव गुप्ता, सीएमजीजीए सुकन्या जर्नादन, डीआईओ रमेश कुमार सहित सभी विभागों के विभागाध्यक्ष व अधिकारी उपस्थित थे।
समीक्षा बैठक में सबसे पहले उपायुक्त ने ई-ऑफिस प्रणाली की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि कोई भी फाइल बिना ई-ऑफिस के न तो स्वीकृत की जाए और न ही भेजी जाए। ई-ऑफिस प्रणाली को प्रभावी रूप से अपने-अपने कार्यालय में लागू करें। कोई भी विभाग ई-ऑफिस के तहत फाइलों का आदान-प्रदान नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि ई-ऑफिस प्रणाली बहुत ही आसान है, जिससे कम समय में अधिक फाइलों का निपटान किया जा सकता है। इस कार्य में कोई दिक्कत आती है, तो उसके लिए सीएमजीजीए व डीआईओ एनआईसी से मिलकर समाधान करवाएं।


उपायुक्त ने परिवार पहचान पत्र(पीपीपी) की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार की अधिकतर योजनाओं को परिवार पहचान पत्र से जोड़ दिया गया है और भविष्य में सभी योजनाओं का लाभ परिवार पहचान पत्र के माध्यम से ही मिलेगा। इसलिए इस कार्य में तेजी लाते हुए इसे शतप्रतिशत पूरा करें। उन्होंने कहा कि जिला में इस कार्य को पूरा करने के लिए 15 फरवरी का लक्ष्य रखा गया है। सभी अधिकारी निर्धारित अवधि समय सीमा से पहले-पहले इस कार्य को पूरा करें। अतिरिक्त उपायुक्त उत्तम सिंह जोकि परिवार पहचान पत्र योजना के नोडल अधिकारी है, ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस कार्य को प्लांनिंग के साथ करें। जिला के अधिक पैंडेंसी के बड़े गांवों को चिन्हित करके, वहां पर विशेष रूप से कार्य करें।


उपायुक्त ने अंत्योदय सरल की समीक्षा करते हुए अधिकारियों की सरल योजना में बेहतर कार्य के लिए सराहना करते हुए इस दिशा में और अधिक तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर आवेदनों को किसी भी सूरत में ऑवर डयू ना होने दें और प्रयास रहे कि राइट टू सर्विस की निर्धारित अवधि से पहले ही निपटान कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि एक विभाग की पैंडेंसी से पूरे जिला की रैंकिग पर असर पड़ता है। इसलिए किसी भी विभाग की पैंडेंसी न रहे। सोशल मीडिया पर आने वाली शिकायतों का भी प्राथमिकता से समाधान करें।

उपायुक्त ने सीएम विंडों की समीक्षा करते हुए कहा कि इस दिशा में काफी सुधार हुआ है। तीन महीने पहले सीएम विंडों की पैंडेंसी 734 थी, जोकि अब 370 रह गई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए पैंडेंसी को जीरो करने की दिशा में तेजी से कार्य करें। सीएम विंडों पर आने वाली शिकायतों का तुरंत निपटान करें, ताकि ऑवर डयू न हो। उपायुक्त ने प्रशिक्षु योजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से कहा कि सभी विभाग नियम अनुसार विभाग में 10 प्रतिशत के हिसाब से प्रशिक्षु रखना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षुओं के रखने से जहां कार्यालय के कार्य में तेजी आएगी, वहीं बेरोजगार युवाओं को रोजगार का भी अवसर उपलब्ध होगा।  


उपायुक्त ने जिला में कोविड-19 की स्थिति व वैक्सीनेशन कार्यक्रम की भी जानकारी ली। सीएमओ ने बताया कि जिला कोरोनामुक्त होने की ओर अग्रसर है और जल्द ही हम कोरोमुक्त होंगे। उन्होंने वैक्सीनेशन की जानकारी देते हुए बताया कि पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों को वैक्सीन दी गई है। इसके लिए जिला में 6275 का टारगेट मिला था, जिसमें से 5024 लाभार्थी सफलतापूर्वक वैक्सीनेट हुए। अब दूसरे चरण में फ्रंट लाइन वर्करों को वैक्सीनेट किया जाएगा, जिसमें पुलिस, राजस्व, स्थानीय शहरी निकाय व पंचायत विभाग के कर्मचारियों को शामिल किया गया है। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि उक्त विभाग 7 फरवरी से पहले-पहले कर्मचारियों को डाटा अपलोड कर दें। इसके अलावा उपायुक्त ने एक-एक कर अन्य योजनाओं की भी समीक्षा करते हुए अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए।

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बैंक से ऋण लेकर स्वरोजगार अपना सकते हैं बीपीएल परिवार : उपायुक्त प्रदीप कुमार

सिरसा, 04 फरवरी।

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                    उपायुक्त प्रदीप कुमार ने बताया कि अनुसूचित जाति वित एवं विकास निगम द्वारा अनुसूचित जाति के बीपीएल परिवारों को विभिन्न बैंकों के माध्यम से स्वयं का रोजगार चलाने के लिए ऋण उपलब्ध करवाया जाता है, जिसमें विभाग द्वारा सब्सिडी भी दी जाती है ताकि ये स्वयं का रोजगार चला कर अपना व अपने परिवार का बेहतर ढंग से पालन पोषण कर सके।


                    उपायुक्त प्रदीप कुमार ने बताया कि विभाग द्वारा भैंस पालन, भेड़ पालन, सुअर पालन, दर्जी कार्य, मनियारी, करियाणा आदि व्यवसाय हेतु विभाग द्वारा ऋण प्रदान किया जाता है। विभाग द्वारा चालू वित्त वर्ष में 211 अनुसूचित जाति के बीपीएल परिवारों को स्वरोजगार शुरु करने के लिए एक करोड़ 35 लाख 35 हजार रुपये का ऋण उपलब्ध करवाया जिसमें 36 लाख 60 हजार रुपये का डायरेक्ट लोन, आठ लाख रुपये सब्सिडी, दो लाख 85 हजार रुपये मार्जिन मनी तथा 87 लाख 90 हजार रुपये बैंक ऋण के रुप में उपलब्ध करवाए गए है।

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                    उपायुक्त ने बताया कि 124 व्यक्तियों को डेयरी फार्मिंग जैसे भेड़ व सूअर पालन के लिए कुल 70 लाख 20 हजार रुपये का ऋण उपलब्ध करवाया जिसमें 6 लाख 10 हजार रुपये सब्सिडी, 64 लाख 10 हजार रुपये बैंक ऋण शामिल है। उन्होंने बताया कि निगम द्वारा लघु व्यवसाय योजना के अंतर्गत 30 व्यक्तियों को 28 लाख 55 हजार रुपये की राशि प्रदान की गई जिसमें एक लाख 90 हजार रुपये सब्सिडी, 2 लाख 85 हजार रुपये मार्जिन मनी तथा 23 लाख 80 हजार रुपये बैंक ऋण के रुप में प्रदान किए। उन्होंने बताया कि लघु व मध्यम उद्योग के लिए 57 व्यक्तियों को 36 लाख 60 हजार रुपये का ऋण दिलवाया गया।


                    उन्होंने अनुसूचित जाति के बीपीएल परिवारों से अपील की है कि वे हरियाणा अनुसूचित जाति वित एवं विकास निगम द्वारा स्वरोजगार हेतु चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उठाएं। उन्होंने निगम के अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे निगम द्वारा चलाई जा रही योजनाओं से धरातल स्तर तक के युवाओं को लाभांवित करें और यह भी सुनिश्चित करें कि कोई भी पात्र व्यक्ति उक्त योजनाओं से वंचित न रहें।

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हरियाणा पुलिस के कोरोना योद्धाओं को कोविड वैक्सीन की डोज़

डीजीपी हरियाणा को लगा पहला टीका

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चंडीगढ़, 4 फरवरी – हरियाणा पुलिस के फ्रंटलाइन योद्धाओं के लिए कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम की आज पुलिस मुख्यालय, पंचकूला में शुरूआत हुई। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) हरियाणा, श्री मनोज यादव ने पहल करते हुए इस अभियान में हिस्सा लेकर पहला टीका लगवाया।  


                 कोविड महामारी के खिलाफ सुरक्षा के लिए टीका लगवाने वाले अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल रहे।

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                 अभियान के पहले दिन सबसे पहले डीजीपी हरियाणा श्री मनोज यादव ने टीका लगवाकर पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को हौसला बढाया। इसके बाद, डीजीपी राज्य सतर्कता ब्यूरो, श्री पी के अग्रवाल, डीजीपी क्राइम मोहम्मद अकील, एडीजीपी प्रशासन और आईटी श्री ए. एस. चावला, एडीजीपी सतर्कता श्री अजय सिंघल, आईजीपी डॉ एम रवि किरण और आईजीपी श्री राजिंदर कुमार, सीपी पंचकूला श्री सौरभ सिंह सहित अन्य पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों ने टीका लगवाया।


                    इस अवसर पर बोलते हुए डीजीपी ने कहा कि जब कोविड महामारी अपने चरम पर थी, तब पूरी पुलिस फोर्स ने निरंतर अग्रिम पंक्ति में रहकर लगातार कार्य किया। प्रदेश में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के अलावा, हमारे प्रत्येक अधिकारी और जवान ने निडर होकर गरीब और जरूरतमंद व्यक्तियों को भोजन, प्रवासी श्रमिकों और मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी और बुजुर्गों की देखभाल करना सुनिश्चित किया। लॉकडाउन में पुलिस का मानवीय चेहरा सामने आया तथा पुलिस के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली।


                   उन्होंने कहा कि कोरोना के चलते अब तक लगभग 3000 राज्य पुलिस कर्मचारी संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें से फ्रंटलाइन पर काम कर रहे 14 पुलिस कर्मियों को कोविड-19 के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी।

भ्रम न रखें, वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित
                   उन्होंने कहा कि इस कोरोना से जंग जीतने के लिए देश में 40 लाख से अधिक व्यक्तियों को पहले ही यह इंजेक्शन दिया जा चुका है और यह पूरी तरह से सुरक्षित है। डीजीपी ने समस्त पुलिस बल के साथ-साथ आम जनता से अपील करते हुए कहा कि वे इस महामारी के खिलाफ टीकाकरण अभियान में आगे आएं और आने वाले दिनों में टीका अवश्य लगवाएं। साथ ही अन्य को भी जागरूक करें ताकि किसी के मन में टीकाकरण को लेकर भ्रम की स्थिति न रहे।  

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Day 3 of Online International Conference on ‘Ideology and Vision of Mahatma Gandhi: Global Relevance in 21st Century at PU

Chandigarh February 3, 2021

Lord Meghnad Desai shed light on Relevance of Gandhi in the 21st century’ on day 2 of International Conference

‘Journey from Mohan to Mahatma” Discussed at PU

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Day 2 of the 3 day International Conference on Ideology and Vision of Mahatma Gandhi: Global Relevance in 21st Century’ was replete with engrossing sessions delivered by eminent speakers from all over the globe.

Session III

The first session of day 2 was moderated by Prof. Simrit Kahlon, Prof. of the Department of Geography. The session began with Prof. Kaushal Sharma, Director, Indian Council for Cultural Relations (ICCR) North sharing views on ‘Nai Talim: Relevance in the 21st century’. Prof Sharma related the Gandhian concept of Nai Talim to the ancient Indian philosophical systems as recorded in the Vedas, Upanishads and Vedanta systems. The Indian concept of education as being a ‘product for salvation’ was geared to make the student more self reliant.

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Prof. Stephen Legg from the School of Geography, University of Nottingham, UK delivered an engrossing presentation on ‘Reapproaching Gandhi’s time in London 1931: Silences and Domestic Spaces’. Prof Legg recounted many interesting incidents, embellished with pictures about the time Gandhi spent in London while attending the Second Round table Conference in London as the representative of the Indian National Congress. Prof Legg drew attention to the fact that Gandhiji choose to stay in the working class neighbourhood of East End of London for the duration of the conference. Gandhi was especially interested in the women from the working class. Nancy Cox McCormach was an artist who followed Gandhiji to Kingsley Hall and joined the other ladies like Mira Behn and Sarojini Naidu who were also in London at that time.

The third speaker of the first session was Prof Petra Molthan-Hill from the Nottingham Business School, Nothingham Trent University, UK. She shared her views on Climate Change Education and its linkages with Gandhian philosophy and views on finding sustainable ways of living. The change and propagation in education can be a key factor in averting climate change and also preparing the next generation to deal with the various challenges and issues posed by the pandemic. Carbon Literacy training and better awareness of the impact of human activity on the climate and environment can be the ways forward as already advocated by the Gandhian concept of sustainable living. The invigorating session concluded with the Vote of Thanks were Dr Simrit Kahlon from the Department of Geography, Panjab University, Chandigarh.

Session IV

The second session of Day 2 was moderated by Major General Dhruv Katoch, Director, India Foundation, New Delhi and had distinguished speakers who shed light on the theme of ‘Sarvodaya and Service of Human Society: Global Relevance Today’. Sir Meghnad Desai, renowned economist from the London School of Economics, UK shared extremely interesting 2 observations on ‘Mohan to Mahatma: How an ordinary young man from Porbandar became Gandhi’. Sir Desai elaborated how self aware and conscious Gandhi was even as a young child, as becomes evident from his reactions on the death of his father. His decision to learn Latin also shows his determination to be different and unstinting ability for diligence. During his London days as a student, Gandhi did not feel discriminated against and at the age of 21, he was convinced that he was not inferior to any one by any means.

Prof Rajvashisth Tripathi from BHU and University of California delved upon ‘Sarvodaya and Human Selfishness: Prospects of regulating selfish genes by human thoughts. Sanatani Sanskriti or Sanatan educated individual is the basis of Indian philosophy and in his book ‘Hind Swaraj’ Gandhi realised that selfishness was at the core of Indian capitalism. Only with Sanatan cultural thinking will India be able to extract the full potential from Nai Talim or the New Education Policy 2020.

Dr Linda Gibson from the School of Social Science, Nottingham Trent University, UK spoke at length about the ethics and philosophy in partnerships. There have to be shared values in the social, cultural and educational context for any partnership to be successful. All partners have to demonstrate ample responsibility and ownership for the partnership to be successful.

Chairperson, Peace Studies, Philippines Prof. Herbert Bufete Rosana spoke about the significance of Gandhi and Tolstoy pacifism in the present geo political situation and security concerns. He described both the global icons Gandhi and Tolstoy as being the embodiments of eastern and Western philosophies. Gandhi was inspired by Tolstoy’s ideas of non-violence and also derived these ideas from Hinduism.

Mr. Sanjoy Singh, Secretary, Government of India also spoke about the relevance of Sarvodaya in today’s times. In the second phase of the freedom movement, Gandhi used the principles of Sarvodaya to establish the vision of society as it would exist in independent India. The basic premise of Sarvodaya and indeed Gandhian philosophy is Love and we should attempt to imbibe this feeling on love for the other.

The stimulating session concluded with the Vote of Thanks by Prof. Anju Suri, Dean International Students, PU and Former Chairperson, Department of History, Panjab University, Chandigarh who is also the Director of the 3 day International conference.