विकास के मामले में रानियां बन रहा अग्रणी हलका : रणजीत सिंह

मनुष्य के बेहतर स्वास्थ्य के लिए पशुओं में होने वाले रोगों पर नियंत्रण जरुरी : डा. चिरन्तन कादियान

सिरसा, 27 अप्रैल।

राजकीय वेटरनरी पॉलिक्लीनिक में मनाया गया विश्व पशु चिकित्सा दिवस 

पूरे भारत में हरियाणा ऐसा पहला राज्य है जहां पर मुंह-खुर व गलघोटु का संयुक्त टीका लगाया जा रहा है। इस संयुक्त टीकाकरण से पशुओं को अब वर्ष में 4 की बजाए 2 बार टीकाकरण की आवश्यकता होगी।

यह बात हरियाणा पशु चिकित्सा परिषद पंचकूला के रजिस्ट्रार डा. चिरन्तन कादियान ने आज स्थानीय राजकीय वेटरनरी पॉलिक्लीनिक के प्रांगण में विश्व पशु चिकित्सा दिवस के अवसर पर टीकाकरण महत्व विषय पर आयोजित संगोष्ठïी में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईसीडीपी विभाग के उप निदेशक डा. सुखविंद्र सिंह ने की।

पशु चिकित्सा शिविर में 58 कुत्तों को लगाए गए एंटी रैबिज के टीके

डा. चिरन्तन कादियान ने कहा कि पशुपालन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुनील गुलाटी व महानिदेशक डा. हरदीप सिंह के अथक प्रयासों से प्रदेश में मुंह-खुर व गलघोटु का संयुक्त टीकाकरण अभियान चल रहा है। इसके अलावा पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए विभाग द्वारा समय-समय पर अनेक प्रकार की गतिविधियां भी आयोजित की जाती है। उन्होंने कहा कि यदि हम अपना स्वास्थ्य अच्छा रखना चाहते हैं तो हमें पशुओं में होने वाले रोगों पर नियंत्रण करना होगा, तभी मानव एवं पशु स्वास्थ्य रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज के परिवेश में अधिकतर बीमारी पशुओं से मानव में प्रवेश कर रही हैं। उन्होंने पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य पर जोर दिया। 

आईसीडीपी विभाग के उप निदेशक डा. सुखविंद्र सिंह ने कहा कि विश्व पशु चिकित्सा दिस की शुरुआत विश्व पशु चिकित्सा एसोसिएशन के प्रधान डा. जिम एडवार्ड व उनकी पत्नी पाम ने वर्ष 2000 से की थी। यह हर वर्ष अप्रैल माह के अंतिम शनिवार को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया को यह बताना है कि पशु चिकित्सक जोखिम भरे कार्य करते हुए मानव जाति को पशुओं से होने वाली बीमारियों से बचाने हेतु हमेशा प्रयासरत रहते है। 

उपमंडल अधिकारी डा. विद्यासागर बांसल ने कहा कि टीकाकरण से 2-3 मिलियन मानव जाति हर वर्ष मौत के मुंह में जाने से बच जाती है तथा साढे 7 लाख बच्चे अपंग होने से बच जाते हैं। आज भी विश्वभर में लगभग 18.7 मिलियन बच्चों को आवश्यक टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध नहीं है तथा मानव जाति संक्रमण करने वाले जीवाणु 75 प्रतिशत से अधिक पशु जनित है। इसी के मद्देनजर मानव जाति को बचाने हेतु पशुओं का टीकाकरण अति महत्वपूर्ण है तथा हम पशु चिकित्सकों का दायित्व और भी बढ जाता है। उन्होंने कहा कि विश्वभर में 100 से अधिक पशुओं की बीमारी संबंधित वैक्सीन बाजारों में उपलब्ध है। 

पशु टीकाकरण शिविर भी आयोजित : 

विश्व पशु चिकित्सा दिवस के उपलब्ध में पालतु कुत्तों को एन्टीरैबिज टीकाकरण व कृमिरहित करने हेतु शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का शुभारंभ उप निदेशक डा. सुखविंद्र सिंह, डा. वीएस बंसल ने कुत्तों में एंटी रैबिज के टीके लगा कर किया। कैंप में डा. प्रेम चंद नंदा, डा. गौरव छाबड़ा, बीएलईओ देवानंद, वीएलडीए प्रवीण कुमार ने 58 कुत्तों को एंटी रैबिज के टीके लगाए। साथ ही शिविर में आने वाले पशु प्रेमियों को टीकाकरण के महत्व तथा गर्मी से बचाने के उपायों की भी जानकारी दी। 

संगोष्ठïी में डा. सुभाष अहलावत, डा. धर्मबीर पोटलिया, डा. अरुण बांसल, डा. सुरेंद्र कुमार उत्ता, डा. ज्ञान बिश्रोई तथा डा. संजीव खन्ना, डा. जितेंद्र मेहता, डा. जगमिंद्र गिल, डा. विक्रम जोशी, डा. जगदीश शीला, सेवानिवृत उप निदेशक मेजर डा. एसआर कौशिक, डा. भजन लाल कम्बोज ने भी अपने विचार व्यक्त किये। 

इस मौके पर जिला के सेवानिवृत पशु चिकित्सा अधिकारियों व कार्यरत पशु चिकित्सा अधिकारियों व आमजन ने बढ़चढ़ कर ने भाग लिया।

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