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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पुलिस अधिकारियों को किशोर अवस्था के बच्चों से संबंधित अपराधिक मामलों में अपनाई जाने वाली कानूनी प्रक्रिया की जानकारी दी गई

पंचकूला, 9 मई-

 जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पुलिस अधिकारियों को किशोर अवस्था के बच्चों से संबंधित अपराधिक मामलों में अपनाई जाने वाली कानूनी प्रक्रिया की जानकारी दी गई। यह कार्यक्रम न्याय परिसर पंचकूला के विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय में आयोजित किया गया, जिसमें किशोर न्याय बोर्ड पंचकूला के प्रिंसीपल मैजिस्ट्रेट सौरभ गुप्ता व मुख्य न्याय दंडाधिकारी विवेक गोयल ने किशोर न्याय व पोक्सो से जुड़े कानूनी पहलुओं की जानकारी दी।

प्रिंसीपल मैजिस्ट्रेट ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि किशोर न्याय अधिनियम बच्चों के कल्याण और सुधार के लिये बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत सामान्य अपराधिक मामलों की तुलना में न्यायिक अपराध से जुड़े मामले के निपटने में अलग प्रक्रिया अपनानी होती है। उन्होंने कहा कि बच्चें अधिक संवेदनशील होते है और उनके लिये दंड प्रक्रिया अपनाने की बजाय सुधार प्रक्रिया अपनानी होती है। इसके अलावा उन्होंने किशोर न्याय के मामले में बाल संरक्षण संस्थानों के कत्र्तव्यों की जानकारी भी दी और इस कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों के साथ साथ महिला एवं बाल विकास, बाल कल्याण और बाल संरक्षण अधिकारी भी उपस्थित थे।

मुख्य न्याय दंडाधिकारी विवेक गोयल ने बच्चों के यौन शोषण से संबंधित अधिनियम 2012 के विभिन्न पहलुओं की भी जानकारी दी। उन्होंने पोक्सो अधिनियम के तहत पीड़ित बच्चों को राहत देने और उनके पुर्नवास से संबंधित योजनाओं की जानकारी दी और ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी विस्तृत चर्चा की। विधिक सेवा प्राधिकरण के पैनल के अधिवक्ता मनबीर राठी ने पाॅवर प्रोजैक्टर के माध्यम से पोक्सो एक्ट और किशोर न्याय के विभिन्न पहलुओं की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी बच्चें को सुधार घर भेजने से पूर्व उसकी चिकित्सा जांच जरूरी है और किशोर बच्चा यदि लड़की है तो उसकी चिकित्सा जांच महिला चिकित्सक द्वारा ही की जानी चाहिए। 

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