विभिन्न वक्ताओं ने जीवन में गीता के महत्व पर अपने विचार किए प्रस्तुत

पंचकूला, 30 नवंबर : राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय, सेक्टर-14 में आयोजित तीन दिवसीय जिला स्तरीय गीता जयंती महोत्सव-2025 के दूसरे दिन आज “गीता की शिक्षाएं’’ विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न वक्ताओं ने जीवन में गीता के महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
मुख्य वक्ता एसडीएम श्री चंद्रकांत कटारिया ने संबोधित करते हुए कहा कि गीता के संदेशों को जीवन में अपनाकर हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया संदेश “कर्म करो, फल की चिंता मत करो’’ हमें यह सिखाता है कि हमें फल की चिंता किए बिना निस्वार्थ भाव से अपना कर्म करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा धर्म और हमारी संस्कृति हमारी पहचान हैं, और आज की युवा पीढ़ी को इन्हें संजोकर रखने की आवश्यकता है। विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि वे जीवन में अनुशासन का पालन करते हुए एक उद्देश्य लेकर आगे बढ़ें और लक्ष्य प्राप्ति तक निरंतर प्रयास करते रहें। उन्होंने कहा कि युवाओं में क्षमता की कोई कमी नहीं है, बस उसे पहचानने की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित श्री रामदिया शास्त्री ने कहा कि महाभारत के युद्ध प्रारंभ होने पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को मोहजाल से निकालने के लिए जिन श्लोकों का सार प्रस्तुत किया, वह हम सभी के लिए अमृत समान है। भगवद्गीता का संदेश सार्वभौमिक है और विश्व के सभी देशों में इसका समान महत्व है। यह ग्रंथ मानव मूल्यों का भंडार है, जो हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। इसकी शिक्षाएं मनुष्य को असफलता से सफलता की ओर ले जाती हैं।
अरुणा असफ अली राजकीय महाविद्यालय, कालका के डाॅ. प्रदीप ने कहा कि गीता महाभारत का अंश है। उन्होंने सृष्टि की रचना पर विस्तारपूर्वक व्याख्यान दिया तथा कहा कि मनुष्य को अपने गुणों को समझकर स्वयं को ईश्वर के अनुकूल बनाना चाहिए।
राजकीय महाविद्यालय, बरवाला के डाॅ. नरेंद्र सिवाच ने कहा कि गीता का मूल-मंत्र “कर्म प्रधान है’’। कर्म समाज के कल्याण के लिए होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए। गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने यही संदेश दिया है कि वही कर्म करो जिसमें स्वार्थ निहित न हो।
माता मनसा देवी संस्कृत महाविद्यालय, पंचकूला के डाॅ. राजबीर कौशिक ने कहा कि गीता से हमें यह शिक्षा मिलती है कि मनुष्य को कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोकता है और वह प्रगति के बजाय पीछे चला जाता है। उन्होंने कहा कि भगवद्गीता के संदेशों को जीवन में अपनाकर हम सुख, समृद्धि और संतोष प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम का मंच-संचालन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सेक्टर-1 पंचकूला के डाॅ. अनिल कुमार पांडे ने किया।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सेक्टर-14 पंचकूला की प्राचार्य डाॅ. खुशीला ने प्रतिभागियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर महाविद्यालय का समस्त स्टाफ और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
