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बुधवार के दिन भगवान गणेश का विधिवत पूजन करने से मनुष्य के जीवन के सभी कष्ट समाप्त होते ऐसा माना जाता है

पंचकूला: बुधवार का दिन रिद्धि -सिद्धि (Ridhi Sidhi) के देवता श्री गणेश को समर्पित है।

इस दिन भगवान गणेश का विधिवत पूजन करने से मनुष्य के जीवन के सभी कष्ट समाप्त होते हैं।

माना जाता है जो भी व्यक्ति गणेश जी की पूजा करता है उसके घर में रिद्धि और सिद्धि का वास होता है। यानी घर में धन के साथ-साथ सुख और समृद्धि दोनों आती है।

गणेश जी की अराधना से कुंडली में बुध ग्रह के दोष भी दूर होते हैं।

अगर आप इस दिन कुछ उपाय भी करते हैं तो आपके जीवन में किसी प्रकार का कष्ट नहीं रहेगा।

  • यदि आपके में नकारात्मक का वास है तो शुक्लपक्ष के बुधवार के दिन घर की पूरी तरह सफाई करें। इसके बाद गणपति की सफेद प्रतिमा स्थापित करें। फिर विधि-विधान से इनकी पूजा करें। 
  • बुधवार के दिन भगवान गणेश के समक्ष गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करने से मनुष्य की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
  • प्रत्येक बुधवार को गाय को हरी घास खिलाएं। यदि हरी घास खिलाना संभव न हो तो हरी सब्जी खिला सकते हैं। ऐसा करने से आपके घर के समस्त क्लेश दूर होते हैं और घर में सुख समृद्धि बनी रहती है। 
  • बुधवार के दिन गणेश जी को सिंदूर अर्पित करें। उन्हें सिंदूर चढ़ाने से व्यक्ति की समस्त परेशानियां दूर होती है।
  • साथ ही घर-परिवार और नौकरी पेशे से संबंधित सभी समस्याओं का समाधान होता है।
  • भगवान गणेश के मंदिर में जाकर उन्हें दूर्वा घास और लड्डू अर्पित करें। गणपति को दूर्वा और लड्डू दोनों ही बहुत अधिक प्रिय हैं। ये चढ़ाने से वो जल्द प्रसन्न हो कामनाओं की पूर्ति करते हैं।
  • यदि आपके में नकारात्मक का वास है तो शुक्लपक्ष के बुधवार के दिन घर की पूरी तरह सफाई करें। इसके बाद गणपति की सफेद प्रतिमा स्थापित करें। फिर विधि-विधान से इनकी पूजा करें। 
  • बुधवार के दिन भगवान गणेश के समक्ष गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करने से मनुष्य की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
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श्री सीता नवमी 2019 को जानकी नवमी भी कहते हैं, जानिेए कैसे ?

श्री सीता नवमी 2019:

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को जनकनंदनी एवं प्रभु श्रीराम की प्राणप्रिया, सर्वमंगलदायिनी, पतिव्रताओं में शिरोमणि श्री सीताजी का प्राकट्य हुआ। यह दिन जानकी नवमी या सीता नवमी के नाम से जाना जाता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार इस पावन पर्व पर जो भी भगवान राम  सहित माँ जानकी का व्रत-पूजन करता है, उसे पृथ्वी दान का फल एवं समस्त तीर्थ भ्रमण का फल स्वतः ही प्राप्त हो जाता है एवं समस्त प्रकार के दु:खों, रोगों व संतापों से मुक्ति मिलती है।

भगवान श्रीराम की अर्द्धांगिनी देवी सीता जी का जन्मदिवस फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को तो मनाया जाता ही है परंतु वैशाख मास के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि को भी जानकी-जयंती के रूप में मनाया जाता है क्योंकि रामायण के अनुसार वे वैशाख में अवतरित हुईं थीं, किन्तु ‘निर्णयसिन्धु’ के ‘कल्पतरु’ ग्रंथानुसार फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष के दिन सीता जी का जन्म हुआ था इसीलिए इस तिथि को सीताष्टमी के नाम से भी संबोद्धित किया गया  है अत: दोनों ही तिथियाँ उनकी जयंती हेतु मान्य हैं तथा दोनों ही तिथियां हिंदू धर्म में बहुत पवित्र मानी गई हैं। इस दिन वैष्णव संप्रदाय के भक्त माता सीता के निमित्त व्रत रखते हैं और पूजन करते हैं। मान्यता है कि जो भी इस दिन व्रत रखता व श्रीराम सहित सीता का विधि-विधान से पूजन करता है, उसे पृथ्वी दान का फल, सोलह महान दानों का फल तथा सभी तीर्थों के दर्शन का फल अपने आप मिल जाता है। अत: इस दिन व्रत करने का विशेष महत्त्व है। 

शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन पुष्य नक्षत्र में जब महाराजा जनक संतान प्राप्ति की कामना से यज्ञ की भूमि तैयार करने के लिए हल से भूमि जोत रहे थे, उसी समय पृथ्वी से एक बालिका का प्राकट्य हुआ। जोती हुई भूमि को तथा हल की नोक को भी ‘सीता’ कहा जाता है, इसलिए बालिका का नाम ‘सीता’ रखा गया। 

सीता जन्म कथा सीता के विषय में रामायण और अन्य ग्रंथों में जो उल्लेख मिलता है, उसके अनुसार मिथिला के राजा जनक के राज में कई वर्षों से वर्षा नहीं हो रही थी। इससे चिंतित होकर जनक ने जब ऋषियों से विचार किया, तब ऋषियों ने सलाह दी कि महाराज स्वयं खेत में हल चलाएँ तो इन्द्र की कृपा हो सकती है। मान्यता है कि बिहार स्थित सीममढ़ी का पुनौरा नामक गाँव ही वह स्थान है, जहाँ राजा जनक ने हल चलाया था। हल चलाते समय हल एक धातु से टकराकर अटक गया। जनक ने उस स्थान की खुदाई करने का आदेश दिया। इस स्थान से एक कलश निकला, जिसमें एक सुंदर कन्या थी। राजा जनक निःसंतान थे। इन्होंने कन्या को ईश्वर की कृपा मानकर पुत्री बना लिया। हल का फल जिसे ‘सीत’ कहते हैं, उससे टकराने के कारण कालश से कन्या बाहर आयी थी, इसलिए कन्या का नाम ‘सीता’रखा गया था। ‘वाल्मीकि रामायण’ के अनुसार श्रीराम के जन्म के सात वर्ष, एक माह बाद वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को जनक द्वारा खेत में हल की नोक (सीत) के स्पर्श से एक कन्या मिली, जिसे उन्होंने सीता नाम दिया। जनक दुलारी होने से ‘जानकी’, मिथिलावासी होने से ‘मिथिलेश’ कुमारी नाम भी उन्हें मिले। वर्तमान में मिथिला नेपाल का हिस्सा हैं अतः नेपाल में इस दिन को बहुत उत्साह से मनाते हैं । वास्तव में सीता, भूमिजा कहलाई क्यूंकि राजा जनक ने उन्हें भूमि से प्राप्त किया था । 

वेदों, उपनिषदों तथा अन्य कई वैदिक वाङ्मय में उनकी अलौकिकता व महिमा का उल्लेख एवं  उनके स्वरूप का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है जहाँ ऋग्वेद में एक स्तुति के अनुसार कहा गया है कि असुरों का नाश करने वाली सीता जी आप हमारा कल्याण करें एवं इसी प्रकार सीता उपनिषद जो कि अथर्ववेदीय शाखा से संबंधित उपनिषद है जिसमें सीता जी की महिमा एवं उनके स्वरूप को व्यक्त किया गया है। इसमें सीता को शाश्वत शक्ति का आधार बताया गया है तथा उन्हें ही प्रकृति में परिलक्षित होते हुए देखा गया है। सीता जी को प्रकृति का स्वरूप कहा गया है तथा योगमाया रूप में स्थापित किया गया है।

अष्टमी तिथि को ही नित्यकर्मों से निर्मित होकर शुद्ध भूमि पर सुंदर मंडप बनाएं, जो तोरण आदि से मंडप के मध्य में सुंदर चौकोर वेदिका पर भगवती सीता एवं भगवान श्री राम की स्थापना करनी चाहिए। पूजन के लिए स्वर्ण, रजत, ताम्र, पीतल, एवं मिट्टी इनमें से यथासंभव किसी एक वस्तु से बनी हुई प्रतिमा की स्थापना की जा सकती है। मूर्ति के अभाव में चित्रपट से भी काम लिया जा सकता है। जो भक्त मानसिक पूजा करते हैं उनकी तो पूजन सामग्री एवं आराध्य सभी भाव में ही होते हैं। भगवती सीता एवं भगवान श्री राम की प्रतिमा के साथ साथ पूजन के लिए राजा जनक, माता सुनैना, पुरोहित शतानंद जी, हल और माता पृथ्वी की भी प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। नवमी के दिन नित्य कर्म से निवृत्त होकर श्री जानकी राम का संकल्प पूर्वक पूजन करना चाहिए। सर्वप्रथम पंचोपचार से श्री गणेश जी और भगवती पार्वती का पूजन करना चाहिए। फिर मंडप के पास ही अष्टदल कमल पर विधिपूर्वक कलश की स्थापना करनी चाहिए। यदि मंडप में प्राण-प्रतिष्ठा हो तो मंडप में स्थापित प्रतिमा या चित्र में प्राण प्रतिष्ठा करनी चाहिए। प्रतिमा के कपड़ों का स्पर्श करना चाहिए। भगवती सीता का श्लोक के अनुसार ध्यान करना चाहिए।आज के दिन माता सीता की पूजन करने से सर्वश्रेष्ठ लाभ प्राप्त होता है।

श्री वाल्मीकि रामायण के अनुसार श्री राम के जन्म के सात वर्ष तथा एक माह पश्चात भगवती सीता जी का प्राकट्य हुआ। गोस्वामी तुलसीदास जी बालकांड के प्रारम्भ में आदिशक्ति सीता जी की वंदना करते हुए कहते हैं :

‘‘उद्भवस्थिति संहारकारिणी क्लेशहारिणीम्।

सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्॥’’

माता जानकी ही जगत की उत्पत्ति, पालन और संहार करने वाली तथा समस्त संकटों तथा क्लेशों को हरने वाली हैं। वह मां भगवती सीता सभी प्रकार का कल्याण करने वाली रामवल्लभा हैं। उन भगवती सीता जी के चरणों में प्रणाम है, मां सीता जी ने ही हनुमान जी को उनकी असीम सेवा भक्ति से प्रसन्न होकर अष्ट सिद्धियों तथा नव-निधियों का स्वामी बनाया।

‘‘अष्टसिद्धि नव-निधि के दाता।

अस वर दीन जानकी माता॥’’

सीता-राम वस्तुत: एक ही हैं।

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कच्चे आम का अचार बनाने की विधि

Kacche Aam ka Achar Recipe : 

आपने अक्सर घर के बड़ों को अचार से पानी को दूर रखने वाली हिदायत को जरूर सुना होगा।

क्योंकि अक्सर अचार में पानी पड़ने से खराब हो जाता है।

आमतौर पर अचार को पानी से दूर रखा जाता है। क्योंकि अक्सर अचार में पानी पड़ने से खराब हो जाता है। ऐसे में अगर हम आपको पानी वाले कच्चे आम के अचार के बारे में बताएं, तो शायद आपको यकीन नहीं होगा।

कच्चे आम का अचार रेसिपी सामग्री

कच्चे आम – 350 ग्राम

पीली सरसों – 50 ग्राम (दरदरी कुटी हुई)

नमक – स्वादानुसार

सरसों का तेल – ¼ कप

सौंफ पाउडर – 2 टेबल स्पून

लाल मिर्च पाउडर – 1 टेबल स्पून

सफेद सिरका – 2 टेबल स्पून

हल्दी पाउडर – 2 चम्मच

मेथी दाना – 1 चम्मच

राई के दाने – 1 चम्मच

सौंफ – 1 चम्मच

हींग – ¼ चम्मच

कच्चे आम का अचार रेसिपी सामग्री

  • कच्चे आम का पानी वाला अचार रेसिपी बनाने के लिए सबसे पहले कच्चे आम को अच्छी तरह से साफ पानी से धोकर, साफ कपड़े से पोंछ लें।
  • इसके बाद आम को चाकू की मदद से काट लें और गुठली को अलग कर दें।
  • अब एक बड़े बर्तन में दरदरी कुटी पीली सरसों, दरदरी कूटी हुई सौंफ, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, नमक और पानी डालकर सभी चीजों को अच्छे से मिक्स कर लें।
  • इसके बाद मसाले में आम के टुकड़ों को डालकर मिक्स कर लें।
  • अब एक पैन में तेल डालकर गर्म करें, फिर उसमें मेथी, राई के दाने, हींग डालकर भूनें और सिरके के साथ आम के अचार के मिश्रण में डालकर मिक्स कर लें।
  • अब कच्चे आम के पानी वाले अचार को एक कांच की बर्नी या कंटेनर में भरकर 3-4 दिनों के लिए धूप में रखें। रोजाना अचार को हिलाते रहें। जिससे मसाले अचार में अच्छे से मिक्स हो सकें।
  • अब तैयार यानि कच्चे आम के पानी वाले अचार के नरम होने पर अपने मनपसंद खाने के साथ खाएं।
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Google ने डूडल बनाकर लुसी विल्स के 131 वें जन्मदिन को मनाया

Google ने डूडल

Google अपने 131 वें जन्मदिन पर Google डूडल के साथ अंग्रेजी हेमेटोलॉजिस्ट लुसी विल्स के जीवन और कार्य का जश्न मना रहा है।

उसे प्रसवपूर्व एनीमिया की रोकथाम के लिए अग्रणी अनुसंधान के लिए याद किया जाता है, 1888 में इंग्लैंड में पैदा हुआ था।

खोज की दिग्गज कंपनी ने एक मेज पर लूसी विल्स के साथ एक डूडल और रोटी के कुछ टुकड़े और उसकी मेज पर एक कप चाय समर्पित की।

आज का डूडल अंग्रेजी के हेमटोलॉजिस्ट लुसी विल्स को मनाता है, जो अग्रणी मेडिकल शोधकर्ता हैं, जिनके जन्मपूर्व एनीमिया के विश्लेषण ने हर जगह महिलाओं के लिए निवारक जन्मपूर्व देखभाल का चेहरा बदल दिया,” Google ने कहा।

लूसी विल्स का जन्म 10 मई 1888 को यूनाइटेड किंगडम में बर्मिंघम के पास सुटन कोल्डफील्ड में हुआ था। विल्स पिता ओवेन्स कॉलेज मैनचेस्टर के विज्ञान स्नातक थे।

वैज्ञानिक मामलों में परिवार की गहरी रुचि थी। लुसी विल्स के परदादा, विलियम विल्स, ब्रिटिश एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ़ साइंस से जुड़े थे और उन्होंने मौसम विज्ञान और अन्य वैज्ञानिक टिप्पणियों पर पत्र लिखे थे।

1911 में, उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के न्यूहैम कॉलेज में वनस्पति विज्ञान और भूविज्ञान में पहला सम्मान अर्जित किया, महिलाओं को शिक्षित करने के मामले में एक और संस्था, इसके बाद लंदन स्कूल ऑफ मेडिसिन फॉर वुमन, महिला डॉक्टरों को प्रशिक्षित करने वाला ब्रिटेन का पहला स्कूल था।

हालांकि, प्रथम विश्व युद्ध के दौरान दक्षिण अफ्रीका में एक नर्स के रूप में काम करने वाली एक स्टेंट ने उन्हें चिकित्सा में कैरियर का फैसला करने के लिए प्रेरित किया, जो केवल हाल ही में इंग्लैंड में महिलाओं के लिए एक विकल्प था।

वह लंदन लौटीं और लंदन स्कूल ऑफ मेडिसिन फॉर वूमेन, इंग्लैंड की पहली मेडिकल स्कूल फॉर वूमेन (बोडेन 2001) में प्रवेश किया और 1920 (Roe 1978) में लंदन विश्वविद्यालय के माध्यम से अपनी मेडिकल डिग्री प्राप्त की।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वह इमरजेंसी मेडिकल सर्विस में पूर्णकालिक पैथोलॉजिस्ट थीं। जुलाई 1944 में कुछ दिनों के लिए पैथोलॉजी विभाग में काम बाधित हो गया (और कई लोग मारे गए) जब अस्पताल को वी 1 फ्लाइंग बम का सीधा झटका लगा।

युद्ध के अंत तक, वह रॉयल फ्री में पैथोलॉजी की प्रभारी थीं और उन्होंने वहां पहले हेमटोलॉजी विभाग की स्थापना की थी।

अपनी सेवानिवृत्ति के बाद, लुसी विल्स ने बड़े पैमाने पर यात्रा की, जिसमें जमैका, फिजी और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे, पोषण और एनीमिया पर अपनी टिप्पणियों को जारी रखा।

लुसी विल्स 1928 और 1933 के बीच भारत में थे, जो ज्यादातर बॉम्बे में हाफकीन इंस्टीट्यूट में थे।

1929 की गर्मियों में, अप्रैल से अक्टूबर तक, उन्होंने अपना काम कुन्नूर के भारतीय पाश्चर संस्थान (जहाँ सर रॉबर्ट मैकक्रिसन पोषण अनुसंधान निदेशक था) में स्थानांतरित कर दिया, और 1931 की शुरुआत में वे मद्रास में जाति और गोशाला अस्पताल में काम कर रही थीं ।

1930, 1931 और 1932 के प्रत्येक ग्रीष्मकाल में वह कुछ महीनों के लिए इंग्लैंड लौट गई और रॉयल फ्री में पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं में अपना काम जारी रखा।

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Fani Cyclone : ओडिशा के तट से टकराएगा, सबसे भीषण तूफान, जानिए आगे ?

ओडिशा :

Fani Cyclone : तटीय ओडिशा में चक्रवात फैनी की वजह से बारिश और तेज हवाएं चलने के बीच करीब 12 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है।

साथ ही लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई है। यह तूफान पुरी के पास सुबह साढ़े नौ बजे दस्तक देगा। अत्यंत प्रचंड च्रकवात ओडिशा के तट की ओर बढ़ रहा है और यह अनुमानित समय दोपहर बाद तीन बजे से बहुत पहले ही सुबह में तटीय क्षेत्र से टकराएगा।

इस बीच, मिली जानकारी के मुताबिक, भारतीय तटरक्ष बल और नौसेना ने भी राहत इंतजाम में अपने पोत और कर्मियों को तैनात किया है।

तट रक्षक बल ने ट्वीट कर कहा कि चक्रवाती तूफान फैनी को देखते हुए 34 राहत दलों और चार तटरक्षक पोतों को राहत कार्य के लिए तैनात किया गया है।

बता दें कि फैनी तूफान के कारण लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं। तटीय इलाके के लोगों को दूसरी जगह पर भेज दिया गया है। ओडिशा के भुवनेश्वर हवाई अड्डे (बीबीआई) से गो-एयर की सभी उड़ानें तीन मई 2019 तक रद कर दी है।

राज्य के मुख्य सचिव ए पी पधी ने कहा कि चक्रवात के धार्मिक नगरी पुरी के बेहद करीब शुक्रवार सुबह साढ़े नौ बजे पहुंचने की आशंका है और इसके यहां टकराने की पूरी प्रक्रिया चार-पांच घंटे की होगी।

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने लोगों से अपील की है कि वे इस दौरान घरों के अंदर ही रहें और कहा कि लोगों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं।

ओडिशा सरकार द्वारा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का कार्य पहले से ही किया जा रहा है। सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जा रहे लोगों के रहने के लिए लगभग 900 तूफान आश्रय स्थल पहले ही तैयार कर लिए गए हैं। 

भारतीय मौसम विभाग ने आगाह करते हुए कहा कि लगभग 1.5 मीटर ऊंची तूफानी लहर उत्पन्न होने की प्रबल आशंका है, जिससे तटीय क्षेत्र से तूफान के टकराने के समय ओडिशा के गंजाम, खुर्दा, पुरी और जगतसिंहपुर जिलों के निचले तटीय क्षेत्रों में बाढ़ आ सकती है।

कैबिनेट सचिव ने राज्यों एवं केन्द्र की विभिन्न एजेंसियों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि असुरक्षित क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित स्थानों एवं तूफान संबंधी आश्रय स्थलों पर पहुंचाया जाए और आवश्यक खाद्य पदार्थों, पेयजल एवं दवाओं का इंतजाम किया जाए।

भारतीय तट रक्षक बल और भारतीय नौसेना ने राहत एवं बचाव कार्य के लिए पोतों तथा हेलीकॉप्टरों को तैनात किया है जबकि भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना को तीन राज्यों में तैयार रहने को कहा गया है।

कैबिनेट सचिव ने आम जनता के लिए एक केन्द्रीय टोल फ्री हेल्पलाइन शुरू करने का निर्देश दिया है।

उन्होंने केन्द्रीय मंत्रालयों से नियंत्रण कक्ष स्थापित करने को कहा है, ताकि राहत एवं बचाव कार्यों में समुचित समन्वय स्थापित किया जा सके।

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आज अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस 2019 है, जिसे मई दिवस के नाम से भी जाना जाता है

दुनियाभर में 1 मई का दिन अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस या मई दिवस के तौर पर मनाया जाता है। 

World Labor Day 2019

जो हर बाधा को करता है दूर, उसका ङटकर मुकाबला करता है, उसका नाम है मज़दूर !

मज़दूर दिवस की शुभकामनाएं!

मई दिवस और मजदूरों की कुर्बानियों के इतिहास के बीच यह भी गौरतलब है कि लड़ कर हासिल तमाम मजदूर अधिकारों का आज छीनने का दौर चल रहा है।

आज अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस 2019 है, जिसे मई दिवस के नाम से भी जाना जाता है।

लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि मजदूर दिवस क्यों मनाया जाता है ,

मजदूर दिवस।

आज ही के दिन 1886 में अमेरिका के शिकागो शहर में मजदूरों ने पूंजीवादी शोषण के खिलाफ और काम के घंटे निर्धारित किये जाने, यूनियन बनाने के अधिकार समेत तमाम मजदूर अधिकारों के लिए ऐतिहासिक हड़ताल की थी।

इस हड़ताल पर बर्बर दमन ढाया गया। कई दिनों तक चले संघर्ष में कई मजदूर हताहत हुए और 8 मजदूर नेताओं को तो एक साल बाद नवम्बर 1887 में फांसी पर चढ़ा दिया गया।

8 घंटे का कार्यदिवस जो पूरी दुनिया मे लागू हुआ, उस अधिकार के लिए मजदूरों की कुर्बानियों के इतिहास का प्रतीक दिन है-मई दिवस। भारत में भी मजदूर अधिकारों के संघर्षों की लंबी परम्परा है।

उसके बाद निरन्तर कपड़ा मिलों, जूट मिलों समेत तमाम कारखानों में मजदूर अपने अधिकारों के लिए लड़ते रहे और हड़ताल को संघर्ष के सब से प्रभावी हथियार के तौर पर उपयोग में लाते रहे।

1908 में देश के मजदूरों ने पहली राजनीतिक हड़ताल की। लोकमान्य तिलक को जून 1908 में अंग्रेजों ने राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी के खिलाफ हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए। जुलाई के महीने में जब मुकदमें की कार्यवाही शुरू हुई तो मजदूरों का संघर्ष और तीखा हो गया।

रूस के क्रांतिकारी नेता कामरेड लेनिन ने इस हड़ताल का स्वागत किया और कहा कि तिलक की गिरफ्तारी के खिलाफ उभरा मजदूरों का यह संघर्ष और उससे पैदा हुए वर्ग चेतना अंग्रेजी साम्राज्य को नेस्तनाबूद कर देगी।

मई दिवस और मजदूरों की कुर्बानियों के इतिहास के बीच यह भी गौरतलब है कि लड़ कर हासिल तमाम मजदूर अधिकारों का आज छीनने का दौर चल रहा है। 8 घण्टे काम का अधिकार हो या यूनियन बनाने का अधिकार, सब धीरे-धीरे खत्म किये जा रहे हैं।

वाइट कॉलर नौकरीपेशा लोगों की एक बड़ी जमात है, जो स्वयं को मजदूर कहलाना पसंद नही करती, लेकिन पूंजी के शोषण की भरपूर मार झेलती है।

मजदूर अधिकारों और श्रम कानूनों पर हमले के इस दौर में अथाह कुर्बानियों से हासिल इन अधिकारों को बचाने के लिए मजदूरों के एकताबद्ध संघर्ष ही एकमात्र रास्ता हैं।

दुनिया में मजदूर अधिकारों का संघर्ष और भारत मे मजदूर अधिकारों के संघर्ष का इतिहास बताता है कि दुनिया भर में मजदूरों ने एक ही तरह से लड़ कर अपने अधिकार हासिल किए हैं।

इसलिये आज जो मई दिवस को बाहरी बता रहे हैं, वे मजदूरों की कुर्बानियों के समूचे इतिहास को ही मिटा देना चाहते हैं। वे मजदूरो के पक्षधर लोग नही हैं। वे मजदूरों के जायज हकों पर डाका डालने वाले, सत्ता में बैठे बाउंसर हैं।

इसलिए मजदूरों के कुर्बानियों के इतिहास में दरार पैदा करने की कोशिशों के खिलाफ मजदूरों की एकता के जरिये मुंहतोड़ जवाब दिया जाए।

दुनियाभर के मेहनतकशों की एकजुटता का आह्वान करने वाले कार्ल मार्क्स के नारे को बुलन्द करें- दुनिया के मजदूरो, एक हो।

जो हर बाधा को करता है दूर, उसका ङटकर मुकाबला करता है, उसका नाम है मज़दूर !

“मज़दूर दिवस की शुभकामनाएं”!

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पवनपुत्र श्री हनुमान जयंती 19 अप्रैल 2019

हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र शुक्‍ल पूर्णिमा को श्री हनुमान जयंती मनाई जाती है। इस बार 19 अप्रैल को हुनमान जयंती है।

आपको बता दें कि भक्‍त अपनी-अपनी मान्‍यताओं के अनुसार साल में अलग-अलग दिन हनुमान जयंती मनाते हैं।हालांकि उत्तर भारत में चैत्र शुक्‍ल पूर्णिमा के दिन मनाई जाने वाली हनुमान जयंती अधिक लोकप्रिय है।

पवनपुत्र हनुमान को भगवान शिव का 11वां अवतार माना जाता है। इस बार हनुमान जन्मोत्सव 19 अप्रैल यानी आज मनाया जा रहा है।

भक्‍तों के लिए हनुमान जयंती का खास महत्‍व है। संकटमोचन हनुमान को प्रसन्‍न करने के लिए भक्‍त पूरे दिन व्रत रखते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं।

मान्‍यता है कि इस दिन पांच या 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करने से पवन पुत्र हनुमान प्रसन्‍न होकर भक्‍तों पर कृपा बरसाते हैं। इस मौके पर मंदिरों में विशेष पूजा-पाठ का आयोजन होता है।

घरों और मंदिरों में भजन-कीर्तन होते हैं। हनुमान जी को प्रसन्‍न करने के लिए सिंदूर चढ़ाया जाता है और सुंदर कांड का पाठ करने का भी प्रावधान है। शाम की आरती के बाद भक्‍तों में प्रसाद वितरित करते हुए सभी के लिए मंगल कामना की जाती है।श्री हनुमान जयंती में कई जगहों पर मेला भी लगता है।

मंदिर में बजरंगबली के दर्शन के लिए सुबह से ही भक्तों की लाइन लगी रही।

इस बात का रखें कि हनुमान के सामने घी का या फिर चमेली के तेल का ही दीपक जलाएं।

स्नान करने के बाद ही प्रसाद तैयार करें। पूजा में हनुमान जी को लाल रंग का ही फूल चढ़ाएं।

जयंती पर हनुमान जी को चोला चढ़ाएं।

हनुमान : ॐ श्री हनुमते नमः।

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राम नवमी हिन्दू धर्म में भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है

रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना करने से विशेष पुण्य मिलता है।

धर्मशास्त्रों के अनुसार राम नवमी के ही दिन त्रेता युग में महाराज दशरथ के घर विष्णु जी के अवतार भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्म रावण के अंत के लिए हुआ था।

हिन्दू धर्म में भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में रामनवमी का त्योहार पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन उपवास और ब्राह्मणों को भोजन कराना भी बहुत फलदायक है। कहते हैं ऐसा करने से घर में धन-समृद्धि आती है।

नवरात्रि के व्रत के बाद नवमी के दिन उत्तर भारत के कई राज्यों में कन्या पूजन किया जाता है। इस बार नवरात्रि में के नवें दिन रामनवमी का त्योहार मनाया जाता है।

13 अप्रैल दिन शनिवार को सुबह दिन में 08:16 बजे तक अष्टमी तिथि होगी

अष्टमी के दिन उत्तर भारत के कई राज्यों में कन्या पूजन किया जाता है।

14 अप्रैल की सुबह 6 बजे से नवमी तिथि लग जाएगी

नवरात्रि के व्रत के बाद नवमी के दिन उत्तर भारत के कई राज्यों में कन्या पूजन किया जाता है।

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खराब मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किये महामाई के दर्शन-उपायुक्त

पंचकूला, 8 अप्रैल-

श्री माता मनसा देवी चेत्र नवरात्र मेला पंचकूला और काली माता मंदिर कालका में आज बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महामाई के दर्शन किये। मौसम खराब होने के बावजूद प्रातः काल से ही लंबी लाईनों में श्रद्धालु माथा टेकने के लिये अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे थे। पुरूषों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलायें और बच्चे भी कतारों में खड़े थे। 

उन्होंने बताया कि श्री माता मनसा देवी श्राईंन बोर्ड पंचकूला द्वारा इस बार दोनों मंदिरों में दर्शनों के लिये की गई अतिरिक्त व्यवस्था होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने के बावजूद किसी भी श्रद्धालु को कोई परेशानी नहीं आई। अन्य सुविधाओं के साथ साथ स्वास्थ्य विभाग द्वारा श्रद्धालुओं को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने के लिये मेला परिसर के नजदीक बस अड्डा और मुख्य द्वार के नजदीक डिस्पेंसरियां स्थापित की हुई है। इन डिस्पेंसरियों पर तैनात डाॅ0 मानव और डाॅ0 नूरी ने बताया कि दोपहर दो बजे तक 835 श्रद्धालु स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले चुके है। इसके अलावा आयुष विभाग द्वारा भी श्रद्धालुओं के लिये निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर स्थापित किया हुआ है और आवश्यकतानुसार श्रद्धालुओं को दवाइयां भी निशुल्क उपलब्ध करवाई जा रही है। 

श्रीमाता मनसा देवी श्राईंन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एस0पी0 अरोड़ा ने बताया कि विभिन्न संस्थाओं द्वारा मेला परिसर में 8 भंडारे लगाये गये है। इसके अलावा श्री कांवड सेवा दल द्वारा निरंतर रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु रक्तदान कर रहे है। 

श्री अरोड़ा ने कहा कि 7 अप्रैल को लगभग 2 लाख श्रद्धालुओं ने महामाई के दर्शन किये। दोनों मंदिरों में 7 अप्रैल तक 2038446 रुपये का चढ़ावा, चांदी के 264 नग तथा सोने के 18 नग चढ़ावे के रूप में दान किये गये है। इसके अलावा यू0एस0ए0 21 डाॅलर, कैनेडा के 7 डाॅलर तथा इग्लैंड के 10 डाॅलर भी दान के रूप में प्राप्त हुए है। उन्होंने बताया कि यह मेला 14 अप्रैल तक जारी रहेगा। 

*“MCC launches ‘Swachhata Ki Karyashala’ to empower students as ambassadors of Cleanliness”*

Happy Navaratri 2019 – 6 अप्रैल 2019 को पूरे देश में नवरात्र 2019 के पावन दिन शुरू हो जाएंगे

नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग अलग 9 रूपों की आराधना की जाती है।

6 अप्रैल 2019 को पूरे देश में नवरात्र 2019 के पावन दिन शुरू हो जाएंगे, साथ ही हिंदूओं का नया साल यानि हिंदू नव वर्ष 2019 शुरू हो जाएगा।

नवरात्रों के पावन दिनों लोग मां दुर्गा की पूजा पाठ करते है और उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं। हिंदू ग्रंथों के मुताबिक, अगर कोई भी मां दुर्गा के पूरे नौ दिनों तक व्रत रखते हैं, तो उनकी इच्छा पूरी हो जाती है।

चैत्र नवरात्र 2019 का पावन पर्व यानि 9 दिनों तक तन और मन से केवल आदि शक्ति की ही आराधना की जाएगी।

नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग अलग 9 रूपों की आराधना की जाती है।

हर जत्न किया जाता है मां को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने का।

नवरात्र पर्व की हिंदू धर्म में खास मान्यता है। ये नौ दिन पूरी तरह से देवी दुर्गा को ही समर्पित होते हैं।