जनता की आवाज को हरियाणा विधानसभा में पहुंचाने के लिए एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) ने आगामी चुनावों में 10 जिलों की 18 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार मैदान में उतारने की आज घोषणा की।

चंडीगढ़: 13 – 09 – 2019:-

जनता की आवाज को हरियाणा विधानसभा में पहुंचाने के लिए एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) ने आगामी चुनावों में 10 जिलों की 18 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार मैदान में उतारने की आज घोषणा की। इनमें भिवानी से राजकुमार बासिया, तोशाम से रोहतास सैनी, बादशाहपुर से रामकिशन प्रजापत, गुडगांव से वजीर सिंह, हांसी से सत्यनारायण भाटौल, बहादुरगढ़ से भारत, बेरी से रवि अहलावत, पुंडरी से कृष्णचंद, थानेसर से राजकुमार सारसा, असंध से करतार सिंह मलिक, अटेली से सुबे सिंह यादव, नारनौल से सीताराम, नांगल चौधरी से छाजू राम रावत, कोसली से रामफल भाकली, रेवाड़ी से नरेश कुमार, राई से जयकरण, सोनीपत से जय भगवान और गोहाना से ईश्वर सिंह दहिया पार्टी के उम्मीदवार होंगे।

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यह जानकारी आज चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) के पोलिट ब्यूरो सदस्य एवं हरियाणा राज्य कमेटी के सचिव सत्यवान ने दी। पत्रकार वार्ता में उनके साथ पार्टी के राज्य सचिव मंडल के सदस्य अनूप सिंह मातनहेल, राजेंद्र सिंह एडवोकेट, रामफल व ईश्वर सिंह राठी भी शामिल थे।


      सत्यवान ने कहा कि ‘जनता का, जनता के द्वारा, जनता के लिए’ शासन की पहले वाली जनतांत्रिक स्थिति अब नहीं है। यहां तक कि विभिन्न पार्टियों में सिद्धांत व नीतियों के मामले में भी अब कोई फर्क नहीं रह गया है। मात्र पूंजीपतियों की सेवा करने की उनमें परस्पर होड़ लगी है।

आजादी के बाद 72 सालों का तजुर्बा बताता है कि चुनावों में धनबल, प्रचार बल, बाहुबल और प्रशासनिक बल का बोलबाला है। चुनाव में आज जनमत या जनहित की कोई झलक नहीं मिलती। केवल बड़े पूंजीपतियों की मनचाही पूरी होती है।

पार्टी के नेताओं ने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार ने भी कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार की जनविरोधी नीतियों को तेजी से आगे बढ़ाया है। कांग्रेस कभी भी धर्मनिरपेक्ष पार्टी नहीं रही। सत्ता के गलियारों में कुछ सीटें पाने के लिए कांग्रेस की पिछलग्गू बनी सीपीएम-सीपीआई उसे यह तगमा देती रही हैं। जन आंदोलन का रास्ता छोड़ कर ये पार्टियां वामपंथ से मुंह मोड़ चुकी हैं।

जनजीवन की ज्वलंत समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए और मेहनतकश जनता की एकता को कमजोर करने के लिए भाजपा धार्मिक कट्टरता, अंध राष्ट्रवाद फैला रही है, सांप्रदायिक व जातिवादी ध्रुवीकरण कर रही है और आपसी फूट, विद्वेष, कलह और विभाजन पैदा कर एक खतरनाक फासीवादी माहौल बना रही है। लोगों के जीवन के वास्तविक मुद्दों को दबाया जा रहा है। नकली सवाल खड़े किए जा रहे हैं। जनतांत्रिक मान्यताओं को ताक पर रखकर एनआरसी की बदनियत भरी योजना के द्वारा असम के 19 लाख लोगों को नागरिकता से वंचित कर देना, धारा 370 को जबरन हटा कर जम्मू-कश्मीर के टुकड़े करना और आदिवासियों को उनकी जमीनों से बेदखल करना ऐसी ही चाले हैं।

एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) की ठोस समझ है कि ऐसी स्थिति में जन आंदोलन के सिवाय लोगों के पास बचने का दूसरा कोई रास्ता नहीं है। केवल सजग और संगठित जनता ही पूंजीपतियों की ताबेदार भाजपा की साम्प्रदायिक फासीवादी राजनीति को विफल कर सकती है और पूंजीवादी शोषण से मुक्ति पाने के लिये चुनावों को भी जन आंदोलन का रूप दे सकती है। अपने गठन काल से ही जन आंदोलन का परचम उठाए हुए एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) प्रदेश में भी जन आंदोलन खड़े करने के लिए जी-जान से प्रयासरत है। यह देश में जन आंदोलन की शक्ति के रूप में उभर कर आ रही है।

अपने शासनकाल में भाजपा ने सत्ता लोलुपता, दल बदल, खरीद फरोख्त को बढ़ावा देकर राजनीति को गिराया है। लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों पर हमले किए हैं। काले कानून पास किए हैं। मजदूरों व गरीब किसानों समेत सभी मेहनतकशों का भारी शोषण-दमन कर चंद बड़े पूंजीपतियों की धन संपत्ति बढ़ाई है। इससे मेहनतकश जनता की खरीद शक्ति शून्य हो गई और बाजार संकट ने अर्थव्यवस्था को महामंदी के भंवर में फंसा दिया है। इसका दंश भी मेहनतकशों को भुगतना पड़ रहा है। गत 5 सालों में सरकारी बैंकों और रिजर्व बैंक के सुरक्षित कोष को बड़े पूंजीपतियों पर लुटा देने के बावजूद अर्थव्यवस्था डूब रही है। नतीजतन, बेरोजगारी व महंगाई ने विकराल रूप ले लिया है। हरियाणा के घर घर में प्रतिभावान, सुशिक्षित-प्रशिक्षित युवक-युवतियाँ रोजगार की बाट जोहते जोहते ओवर-ऐज हो रहे हैं। छंटनी व तालाबंदी से हजारों मजदूर-कर्मचारियों की नौकरी जा रही है। दफ्तरों में खाली पड़े पदों को भरने की बजाय नौकरी से निकाला जा रहा है। सालाना 2 करोड़ रोजगार देने, विदेशों में जमा काला धन लाने, किसानों के कर्ज माफ करने, उनकी फसलों के लागत से डेढ़ गुना दाम देने, उन्हें बिना ब्याज ऋण देने, नये उद्योग लगाने, सिंचाई व शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था करने, सार्वजनिक-सरकारी संसाधनों की लूट पर रोक लगाने जैसे इसके वादे मात्र जुमले साबित हुए हैं। कर्मचारियों की पुरानी पेंशन स्कीम बहाल नहीं की। डीजल, पेट्रोल व रसोई गैस के अलावा खाद, बीज, कीटनाशक और जीवन उपयोगी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। शिक्षा व चिकित्सा आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई। रेवाड़ी के मनेठी में एम्स निर्माण के वायदे से मोदी व खट्टर सरकार निर्लज्जता से पीछे हट गई हैं।

 शिक्षा का स्तर उन्नत करने के लिए सरकारी स्कूलों में पास-फेल परीक्षा प्रणाली बहाल नहीं की। उल्टे, सरकारी स्कूलों को ताले मारे जा रहे हैं। प्रदेश में 429 सरकारी स्कूलों में विज्ञान व गणित की पढ़ाई बंद करके देहात के बच्चों के साथ भारी भेदभाव किया है। भाजपा शासन में बच्चियों व महिलाओं से दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ी हैं। वाहनों पर भारी जुर्माने का मकसद दुर्घटनायें रोकने की बजाय नाजायज वसूली करना है।


एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) ने इन सभी पहलुओं को लेकर पूंजीपतियों की दो प्रधान पार्टियों भाजपा व कांग्रेस समेत जनविरोधी राजनीति को परास्त करने के लिये मेहनतकशों व जनतांत्रिक सोच-समझ के लोगों से आगामी विधानसभा चुनावों में सक्रिय रूप से अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

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